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कानून से ऊपर कोई नहीं! शराब ग्रुप सोम डिस्टिलरीज को सीएम मोहन यादव का तगड़ा झटका; अवैध आचरण और फर्जी परमिट के चलते आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण रद्द

कानून से ऊपर कोई नहीं! शराब ग्रुप सोम डिस्टिलरीज को सीएम मोहन यादव का तगड़ा झटका; अवैध आचरण और फर्जी परमिट के चलते आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण रद्द

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The Khabrilal

Published On: Jun 18, 2026, 8:38 PM IST

Updated On: Jun 18, 2026, 8:38 PM IST

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भोपाल: मध्य प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सूबे के माफियाओं और रसूखदारों को एक बार फिर सबसे बड़ा और कड़ा प्रशासनिक संदेश दे दिया है। सरकार ने आबकारी विभाग (Excise Department) के इतिहास की एक बेहद बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सूबे के सबसे रसूखदार शराब कारोबारी समूह ‘सोम डिस्टिलरीज’ (Som Distilleries) को घुटनों पर ला दिया है। राज्य सरकार ने ग्रुप की विभिन्न इकाइयों द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दिए गए आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण (Renewal) के आवेदनों को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। सरकार के इस कड़े और अप्रत्याशित कदम से साफ हो गया है कि प्रदेश में अब रसूख की धौंस नहीं चलेगी।

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‘रिन्यूअल कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं’ — आबकारी आयुक्त

आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किए गए इस कड़े और विधिक आदेश की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • कठोर विधिक परीक्षण: आबकारी आयुक्त ने अपने आधिकारिक आदेश में बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यावसायिक संस्था या डिस्टिलरी के लाइसेंस का नवीनीकरण कोई स्वचालित (Automatic) प्रक्रिया या अधिकार स्वरूप प्राप्त होने वाली चीज नहीं है।
  • मप्र आबकारी अधिनियम 1915 का उपयोग: इसके लिए कंपनी के पिछले आचरण, विधिक अनुपालन, नियमों और शर्तों के पालन के साथ-साथ सार्वजनिक हित का कड़ाई से परीक्षण करना आबकारी विभाग का दायित्व है। इसी आधार पर यह बड़ा फैसला लिया गया।

फाइलों से बाहर आए पुराने पाप: इन गंभीर वजहों से थमा सोम ग्रुप का पहिया

जांच और निर्णय प्रक्रिया के दौरान सोम डिस्टिलरीज से जुड़े कई पुराने और गंभीर वित्तीय व आपराधिक मामले दोबारा फाइलों से बाहर आए, जिन्हें इस बड़ी रिजेक्शन का मुख्य आधार बनाया गया है:

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  1. अवैध शराब का परिवहन: समूह से जुड़ी इकाइयों पर पूर्व में मध्य प्रदेश के भीतर और बाहर बड़े पैमाने पर अवैध शराब के परिवहन करने के गंभीर आरोप लगे थे।
  2. फर्जी व कूटरचित परमिट: जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि समूह द्वारा एक्साइज ड्यूटी बचाने के लिए फर्जी और कूटरचित (Forged) परमिटों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा था।
  3. सरकारी खजाने को चपत: टैक्स चोरी और राजस्व अपवंचन के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान पहुंचाने के कई गंभीर प्रकरण विभिन्न न्यायालयों के समक्ष पहले से ही विचाराधीन हैं।

हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत; सरकार को मिली थी स्वतंत्र फैसले की छूट

कानूनी पहलू और कोर्ट का स्टैंड —

“यह पूरा मामला पहले माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के समक्ष भी गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में साफ किया था कि आबकारी लाइसेंस रिन्यूअल के मामलों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और संबंधित पक्ष के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर पूरी तरह स्वतंत्र और कारणयुक्त (Reasoned Order) तरीके से किया जाना चाहिए। कोर्ट से किसी भी प्रकार की राहत न मिलने के बाद सक्षम आबकारी प्राधिकारी ने स्वतंत्र रूप से यह कड़ा कदम उठाया है।”

सीएम मोहन यादव की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश के आबकारी महकमे और रसूखदार सिंडिकेट चलाने वाले बड़े शराब ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य बड़े समूहों पर भी नियमों के उल्लंघन को लेकर ऐसी ही गाज गिर सकती है।

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