Sign In
/
/
मऊगंज में अवैध खनन माफिया पर कसेगा शिकंजा: कलेक्टर और एसपी ने खुद संभाली कमान, सरदमन गांव में अचानक पहुंचे आला अफसर

मऊगंज में अवैध खनन माफिया पर कसेगा शिकंजा: कलेक्टर और एसपी ने खुद संभाली कमान, सरदमन गांव में अचानक पहुंचे आला अफसर

[inb_subtitle]

विज्ञापन

The Khabrilal

Published On: Jun 9, 2026, 6:22 PM IST

Updated On: Jun 9, 2026, 6:22 PM IST

🔗 Link Copied!
🔗 Link Copied!

मऊगंज (पिपराही): मऊगंज जिले में अवैध उत्खनन और नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चलाई जा रही खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी तरह कमर कस ली है। क्षेत्र से लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर संजय कुमार जैन और पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्वयं मैदान में उतरकर पिपराही के सरदमन गांव का औचक और संयुक्त निरीक्षण किया। अधिकारियों के इस औचक दौरे से अवैध उत्खनन करने वालों और क्रेशर संचालकों में हड़कंप मच गया है। दोनों आला अफसरों ने बारीकी से खनन क्षेत्र, परिवहन मार्ग और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उठाए गए विवादित मुद्दों का जायजा लिया।

Advertisement

भास्कर हाइलाइट्स: रास्ते के विवाद पर आपसी सहमति का रास्ता

निरीक्षण के दौरान कड़े फैसले लेते हुए कलेक्टर संजय कुमार जैन ने जमीनी हकीकत को देखा और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को सख्त लहजे में जरूरी निर्देश जारी किए:

  • परिवहन मार्ग की होगी जांच: वर्तमान में खनन परिवहन के लिए उपयोग किए जा रहे रास्तों की विधिवत जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारी वाहनों की आवाजाही से स्थानीय ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा या विवाद का सामना न करना पड़े।
  • वैधानिक अनुबंध के निर्देश: यदि क्रेशर के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग की आवश्यकता होती है, तो संबंधित भूमि स्वामी और सिद्धिविनायक स्टोन क्रेशर संचालक के बीच आपसी सहमति से वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिखित अनुबंध (एग्रीमेंट) कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति न बने।

SDM और खनिज अधिकारी करेंगे संयुक्त जांच, सौंपनी होगी रिपोर्ट

कलेक्टर ने अवैध उत्खनन संबंधी शिकायतों की जड़ तक पहुंचने और इसकी निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय टीम को जिम्मा सौंपा है:

Advertisement

  1. संयुक्त जांच दल गठित: अनुविभागीय अधिकारी (SDM) मऊगंज एवं जिला खनिज अधिकारी को संयुक्त रूप से पूरे माइनिंग एरिया की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।
  2. शर्तों की समीक्षा: जांच टीम को एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह पूरी तरह स्पष्ट किया जाएगा कि वर्तमान में संचालित हो रही खनन गतिविधियां निर्धारित सरकारी नियमों और स्वीकृत शर्तों के दायरे में हैं या नहीं।

स्वीकृत क्षेत्र से बाहर ब्लास्टिंग की तो खैर नहीं, अफसर की मौजूदगी अनिवार्य

ग्रामीणों द्वारा अवैध और अत्यधिक ब्लास्टिंग की शिकायतों पर भी कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि जिस क्षेत्र में ब्लास्टिंग (Blasting) की अनुमति प्रदान की गई है, उसकी जीपीएस और तकनीकी जांच की जाए। स्वीकृत क्षेत्र से एक इंच भी अधिक हिस्से में विस्फोटक कार्य पाए जाने पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।

कलेक्टर का कड़ा रुख:

“क्रेशर क्षेत्र में जब भी ब्लास्टिंग की कार्रवाई की जाए, वह सक्षम प्रशासनिक या खनिज अधिकारी की प्रत्यक्ष उपस्थिति में ही संपन्न होनी चाहिए। सुरक्षा मानकों और वैधानिक प्रावधानों का पूर्ण पालन हर हाल में अनिवार्य है। नियमों का रत्ती भर भी उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित क्रेशर संचालक के विरुद्ध कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

होम
MP ब्रेकिंग
Join करें
Join करें
मेन्यू