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सतना जिला अस्पताल में अंधेरगर्दी: बिना देखे OPD गेट पर जड़ दिया ताला, अंदर ही बंद रह गईं दो छात्राएं; रो-रोकर मांगती रहीं मदद, मंचा हड़कंप

सतना जिला अस्पताल में अंधेरगर्दी: बिना देखे OPD गेट पर जड़ दिया ताला, अंदर ही बंद रह गईं दो छात्राएं; रो-रोकर मांगती रहीं मदद, मंचा हड़कंप

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The Khabrilal

Published On: Jun 5, 2026, 6:34 PM IST

Updated On: Jun 5, 2026, 6:34 PM IST

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सतना, मध्य प्रदेश: सतना के सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के नवीन ओपीडी (OPD) भवन में इलाज कराने आई दो छात्राओं को ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने अंदर चेक किए बिना ही बाहर से ताला जड़ दिया और घर चले गए। अचानक खुद को सुनसान सरकारी भवन में कैद पाकर छात्राएं घबरा गईं और रोते हुए बाहर निकलने के लिए गिड़गिड़ाने लगीं।

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दोपहर 2 बजे टाइम हुआ पूरा, केबिन के बाहर बैठी रह गईं छात्राएं

यह पूरी घटना सतना जिला अस्पताल के नवनिर्मित ओपीडी भवन की है, जिसने अस्पताल के सुरक्षा और प्रशासनिक अमले की पोल खोलकर रख दी है:

  • डॉक्टर का कर रही थीं इंतजार: दोनों छात्राएं दोपहर के वक्त नवीन ओपीडी भवन के भीतर डॉक्टर के केबिन के बाहर बेंच पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं।
  • लापरवाही की हद: जिला अस्पताल के नियमानुसार दोपहर 2:00 बजे ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है। समय पूरा होते ही वहां तैनात कर्मचारियों ने बिना अंदर झांके या तस्दीक किए कि कोई मरीज अंदर बचा है या नहीं, सीधे मुख्य चैनल गेट खींचा और उस पर भारी-भरकम ताला लटकाकर रफूचक्कर हो गए।

भीतर कैद रहीं छात्राएं; चीख-पुकार सुनकर दौड़े लोग

ताला बंद होने के बाद जब छात्राओं को भनक लगी, तो उनके होश उड़ गए। पूरा ओपीडी ब्लॉक खाली हो चुका था:

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  • घंटों मची रही छटपटाहट: ओपीडी के लोहे के गेट के अंदर फंसी छात्राओं ने बाहर निकलने के लिए जोर-जोर से आवाजें लगाईं, लेकिन काफी देर तक अस्पताल परिसर में किसी ने उनकी सुध नहीं ली। अस्पताल के आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि काफी देर तक छात्राएं भीतर ही लाचार होकर कैद रहीं।
  • भीड़ ने दी सूचना: जब दोनों लड़कियां बुरी तरह घबराकर रोने लगीं और उनके चिल्लाने की आवाज तेज हुई, तब जाकर अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों और राहगीरों का ध्यान गेट की तरफ गया। अंदर लड़कियों को रोता देख बाहर खड़े लोगों ने तुरंत इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा गार्ड्स को दी।

हाथ-पांव फूले तो आनन-फानन में मंगाई गई चाबी

सरकारी अस्पताल के भीतर दो छात्राओं के बंधक बनने की खबर जैसे ही फैली, अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। लीपापोती में जुटे कर्मचारी आनन-फानन में चाबी लेकर दौड़ते हुए आए और ताला खोला, तब जाकर दोनों छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

जनता का फूटा गुस्सा: “अगर कोई गंभीर मरीज होता तो क्या होता?”

सुरक्षित बाहर निकलने के बाद छात्राओं का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सवाल किया कि अगर उनकी जगह अंदर कोई बेहद गंभीर मरीज होता और दम घुटने या इलाज न मिलने से उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने सिविल सर्जन और सीएमएचओ (CMHO) से मांग की है कि ऑन-ड्यूटी लापरवाह कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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