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मैहर में सिंघाड़ा किसानों पर ‘लाल खजूरा’ का कहर: पौध तैयार होने से पहले ही फसल बर्बाद; रोते हुए बोले किसान— ‘4 साल से सब तबाह हो रहा, नेता-अफसर कोई नहीं सुनता’

मैहर में सिंघाड़ा किसानों पर ‘लाल खजूरा’ का कहर: पौध तैयार होने से पहले ही फसल बर्बाद; रोते हुए बोले किसान— ‘4 साल से सब तबाह हो रहा, नेता-अफसर कोई नहीं सुनता’

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The Khabrilal

Published On: May 27, 2026, 6:24 PM IST

Updated On: May 28, 2026, 11:20 AM IST

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मैहर जिले में सिंघाड़ा खेती का नया सीजन शुरू होते ही किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। जिले के हर्रई,नौगाँव न. 4,झिन्ना, हिनौता,मड़करा,अमरपाटन, लालपुर, रिगरा,जरियारी, सहित कई गांवों में सिंघाड़े की फसल प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों का आरोप है कि फसल में शुरुआती अवस्था में ही “लाल खजूरा” नाम से पहचाने जाने वाले कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है, जिसके कारण पौध तैयार नहीं हो पा रही है और उत्पादन पर संकट मंडराने लगा है।

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किसानों के अनुसार इस बार तालाबों में सिंघाड़े की रोपाई के बाद पौधों की वृद्धि सामान्य नहीं हो रही है। कई स्थानों पर पौध लाल पड़कर कमजोर हो रही है और धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है। किसानों का कहना है कि सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हो चुकी है। यदि समय रहते प्रभावी उपचार नहीं किया गया तो इस वर्ष सिंघाड़ा उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
स्थानीय किसानों ने बताया कि सिंघाड़ा खेती उनके लिए आय का प्रमुख स्रोत है। फसल खराब होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। खेती में बीज, मजदूरी, तालाब प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों पर पहले ही काफी खर्च किया जा चुका है। ऐसे में रोग अथवा कीट प्रकोप के कारण फसल नष्ट होने से उनकी मेहनत और निवेश दोनों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।

किसानों ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की टीम प्रभावित तालाबों का निरीक्षण करे और यह स्पष्ट करे कि फसल में किस प्रकार का कीट या रोग लगा है। साथ ही उसके नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक उपचार एवं आवश्यक दवाओं की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन कराने और किसानों को आर्थिक सहायता अथवा मुआवजा देने की मांग भी उठाई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो सिंघाड़ा उत्पादन से जुड़े सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। अब किसानों की निगाहें प्रशासन और कृषि विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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BYTE DETAILS WITH NAME & DESIGNATION- 1वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है सिंघाड़े की फसल में थोड़ी समस्या आ रही है मामला उद्यानिकी विभाग का है हम प्रयास करेंगे कि संयुक्त रूप से हम किसानों की समस्या का निदान करेंगे

किसान बुटान सिंगरहा ने बताया कि हमारी सिंघाड़ा की खेती है शासन हमको किसान नहीं मान रहा और हम लोग घर का खर्चा नहीं चला पा रहे बच्चों की पढ़ाई नहीं करा पा रहे शासन मुआवजा नहीं देती हमारी फसल बर्बाद हो जाती है दवा ऐसी नहीं बन पा रही जो सुरक्षित रखे फसल को हमारी

शांति केवट ने बताया कि हमारे सिंघारे की खेती नष्ट हो रही है हमारे बच्चे क्या करे कैसे पढ़ाए लिखाए 4 साल से खेती खराब हो जाती है हमारा परिवार इसी खेती से चलता है

किसान पप्पू सिंगरहा ने बताया कि सिंघारे की खेती हम और हमारा समाज कई वर्षों से कर रहा है लेकिन आज ये समस्या आ रही है कि हर वर्षों की तरह लगातार 4 वर्षों से हमारी फसल खराब हो रही हम जैसे फसल लगाते है फसल लगने के बाद लाल खूजा नामक कीड़ा लग जाता है जिसके लिए हम शासन प्रशासन से गुहार लगा चुके कोई नहीं सुन रहा हम सिंघाड़ा किसानों को मुआवजा दिलाया जाय

किसान श्यामलाल सिंगरहा बताया कि हम जबसे जानने लायक हुय तब से सिंघाड़ा की खेती करते है 3-4 साल से रोग लग रहा खेती में हमारी कोई सुनने वाला नहीं विधायक से मंत्री से शासन प्रशासन से विनती गुहार लगा चुके कोई सुनने वाला नहीं इसलिए हमारा अनुरोध है कि बाल बच्चों के हमारे भरण पोषण के लिए मुआवजा दिलाया जाय जिससे हमारा परिवार चल सके

REPORTE- धर्मेंद्र वर्मा 9589020759

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