‘सिंधिया गए तो कुछ नहीं हुआ, अब किस बात का खौफ’: राज्यसभा चुनाव के बीच दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह अपनी ही पार्टी पर बरसे; राहुल गांधी पर सीधा तंज

गुना: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों और कांग्रेस के भीतर मची ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की खलबली के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने बगावती बिगुल फूंक दिया है। गुना के एक निजी होटल में मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व सांसद ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और दिल्ली आलाकमान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ शब्दों में दिल्ली के नेतृत्व को ‘कमजोर’ बताते हुए उसे तुरंत बदलने की मांग कर डाली है। लक्ष्मण सिंह के इस बयान से राज्यसभा चुनाव के ऐन वक्त पर कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी और नाराजगी एक बार फिर सरेआम उजागर हो गई है।

भास्कर हाइलाइट्स: विधायकों को छुपाने की नौबत क्यों?

  • शीर्ष नेतृत्व पर अविश्वास: विधायकों को तेलंगाना या कर्नाटक शिफ्ट करने की खबरों पर लक्ष्मण सिंह ने कहा कि पार्टी को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है। अगर चुनाव के वक्त विधायकों को छुपाने या बाहर भेजने की नौबत आ रही है, तो यह साफ है कि विधायकों का अपने शीर्ष नेतृत्व से भरोसा उठ चुका है।
  • सिंधिया का दिया हवाला: लक्ष्मण सिंह ने आलाकमान को आईना दिखाते हुए पूछा— “जब ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता के 22 विधायकों के साथ बीजेपी में जाने के बाद भी कांग्रेस खत्म नहीं हुई और बची रही, तो अब नेतृत्व को किस बात का डर सता रहा है? मेरी समझ से परे है कि कांग्रेस अपना उम्मीदवार आसानी से जिता सकती है, फिर भी ये लोग इतने डरे और घबराए क्यों हैं?”

‘कार्यकर्ता परेशान हैं और बड़े नेता स्कूबा डाइविंग में व्यस्त हैं’ — राहुल गांधी पर सीधा निशाना

लक्ष्मण सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की कार्यप्रणाली की तुलना भाजपा से करते हुए दिल्ली दरबार (विशेषकर राहुल गांधी की हालिया गतिविधियों) पर तीखा कटाक्ष किया:

दिल्ली से थोपे जा रहे फैसले: “जमीन पर और बूथ स्तर पर संघर्ष करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को राज्यसभा का टिकट मिलना चाहिए था, लेकिन फैसले हमेशा की तरह दिल्ली से थोपे जा रहे हैं। मध्य प्रदेश का जमीनी कार्यकर्ता जब अपना विरोध दर्ज कराने दिल्ली मुख्यालय जाता है, तो वहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं है, क्योंकि आलाकमान के बड़े नेता विदेशों में स्कूबा डाइविंग करने में व्यस्त हैं।”

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक दिल्ली से मनमर्जी के फैसले थोपना बंद नहीं होगा और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को हक नहीं मिलेगा, तब तक कांग्रेस में किसी भी तरह का सुधार होना पूरी तरह नामुमकिन है।

NEET परीक्षा को देश में तुरंत बैन करने की मांग

इस सियासी घमासान के बीच पूर्व सांसद ने देश की शिक्षा व्यवस्था और लगातार विवादों व पेपर लीक के आरोपों से घिरी नीट (NEET) परीक्षा पर भी बेहद बेबाक राय रखी।

लक्ष्मण सिंह ने मांग की कि नीट जैसी परीक्षाओं को देश में तुरंत और पूरी तरह से प्रतिबंधित (बैन) कर देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यह परीक्षा अमीर और गरीब बच्चों के बीच एक गहरी खाई और भेदभाव पैदा कर रही है। जो छात्र लाखों की भारी-भरकम फीस देकर बड़े शहरों में कोचिंग नहीं कर सकते, वे इस रेस से बाहर हो रहे हैं। पैसों के अभाव में देश का गरीब और होनहार बच्चा डॉक्टर बनने से महरूम रह रहा है, इसलिए देश को ऐसी परीक्षा की कोई जरूरत नहीं है।

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