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एमपी के ‘कान्हा’ मॉडल का मुरीद हुआ मलेशिया: अनाथ शावकों को ‘जंगल का राजा’ बनाने की तकनीक सीखेगा पड़ोसी देश; 7 सदस्यीय डेलिगेशन पहुंचा मंडला

एमपी के ‘कान्हा’ मॉडल का मुरीद हुआ मलेशिया: अनाथ शावकों को ‘जंगल का राजा’ बनाने की तकनीक सीखेगा पड़ोसी देश; 7 सदस्यीय डेलिगेशन पहुंचा मंडला

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The Khabrilal

Published On: May 9, 2026, 9:35 PM IST

Updated On: May 9, 2026, 9:35 PM IST

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भोपाल/मंडला |मध्य प्रदेश का विश्व प्रसिद्ध ‘कान्हा टाइगर रिजर्व’ अब वैश्विक स्तर पर वन्यजीव प्रबंधन के लिए रोल मॉडल बन गया है। कान्हा में अनाथ हुए बाघ के शावकों (Orphan Cubs) को पालने, उन्हें शिकार सिखाने और फिर से सफलतापूर्वक घने जंगल में स्थापित करने की बेजोड़ तकनीक को सीखने के लिए मलेशियाई वन विभाग का एक 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल कान्हा पहुंचा है। तीन दिवसीय अध्ययन दौरे पर आए इस विदेशी दल ने कान्हा की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को देखकर कहा कि वे अपने देश में भी इसी सफल भारतीय मॉडल को लागू करेंगे।

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मुख्य बिंदु

  • ग्लोबल बना कान्हा का मॉडल: मलेशिया के 7 वरिष्ठ वन अधिकारियों की टीम कान्हा टाइगर रिजर्व के तीन दिवसीय विशेष दौरे पर है।
  • अनाथ शावकों पर विशेष फोकस: डेलिगेशन ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी इस बात में दिखाई कि कैसे बिना मां के अनाथ हुए छोटे शावकों को इंसानी छुअन से बचाकर प्राकृतिक रूप से बड़ा और आत्मनिर्भर बनाया जाता है।
  • मलेशिया अपनाएगा यह तकनीक: मलेशियाई दल ने खटिया ईको सेंटर में विशेषज्ञों से प्रेजेंटेशन के जरिए मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और आधुनिक वन प्रबंधन को बारीकी से समझा।
  • ग्राम पुनर्स्थापन की सराहना: बाघों के संरक्षण के साथ-साथ जंगलों के बीच बसे गांवों को सम्मानजनक तरीके से बाहर विस्थापित (Village Relocation) करने के कान्हा के फॉर्मूले को भी विदेशी विशेषज्ञों ने सराहा।

मलेशियाई दल को खुद फील्ड डायरेक्टर ने कराया भ्रमण

कान्हा टाइगर रिजर्व के मंडला जिले वाले हिस्से में पहुंचे मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल को मध्य प्रदेश वन विभाग के आला अधिकारियों ने पूरा फील्ड विजिट कराया।

  1. फील्ड विजिट: एपीसीसीएफ (APCCF) एल. कृष्णमूर्ति और फील्ड डायरेक्टर रवींद्र मणि त्रिपाठी ने विदेशी मेहमानों को उन बाड़ों (Inclosures) का मुआयना कराया जहां अनाथ शावकों को प्राकृतिक माहौल में रखकर शिकार करना सिखाया जाता है।
  2. विशेष चर्चा सत्र: खटिया ईको सेंटर में आयोजित पहले दिन के सत्र में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच.एस. नेगी सहित कई सीनियर वन्यजीव विशेषज्ञों ने कान्हा की सफल केस स्टडीज उनके सामने रखीं।

क्यों खास है कान्हा का ‘अनाथ शावक पुनर्वास’ मॉडल?

आमतौर पर चिड़ियाघर या इंसानी देखरेख में पले-बढ़े बाघ के बच्चे आदमखोर हो जाते हैं या खुद शिकार नहीं कर पाने के कारण जंगल में सर्वाइव नहीं कर पाते। लेकिन कान्हा टाइगर रिजर्व ने देश में पहली बार ऐसी अनूठी तकनीक विकसित की है, जिसमें इंसानी संपर्क को पूरी तरह शून्य (Zero Human Imprinting) रखकर अनाथ शावकों को बड़े बाड़ों में जीवित शिकार सौंपकर ट्रेंड किया जाता है। यही कारण है कि कान्हा से प्रशिक्षित होकर निकले अनाथ शावक आज जंगलों में सफलतापूर्वक नए कुनबे बसा रहे हैं।

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सफलता की गूंज

  • मेहमान दल: मलेशिया वन विभाग का 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल।
  • अध्ययन का केंद्र: अनाथ बाघ शावकों का पुनर्वास, ग्राम विस्थापन और पर्यटन प्रबंधन।
  • प्रमुख मेजबान अधिकारी: डॉ. एच.एस. नेगी (APCCF), एल. कृष्णमूर्ति और फील्ड डायरेक्टर रवींद्र मणि त्रिपाठी।
  • फीडबैक: मलेशियाई दल ने कान्हा के मैनेजमेंट को पूरी तरह “विश्व स्तरीय” करार दिया।

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